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Showing posts from July, 2017

Rewards and Appreciation

नमस्ते।

I saw one of the Bollywood actors, Akshay Kumar in an interview with Anupam Kher saying appreciation of sportsman, social activists or anyone should be done monetarily and not by just giving certificates. He went on saying that every individual to achieve something spends money and needs money to work further upon his/her objective and hence, only certificate of appreciation is not enough. Especially, if it is youth whose parents has supported him/her to achieve success, in return, if youth gets prize money, his/her parents would be proud that their son/daughter has become money-earner - probably, the proudest feeling for parents.

I liked this idea.  

I see giving awards has become a business in many cases, that will stop to a great extent if the norm of prize money is followed, people receiving awards will get money that they can use for further work that they are into. 


लोकशाही,अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य और सेना

नमस्ते !

मेरे दादा  मानिकचंद लोढ़ा  भारत के स्वातंत्र के पहले की बात  कहते  तो बताते थे की ब्रिटिश सरकार का  कोई अफ़्सर गली से गुजरता हो तो पूरा माहौल शांत हो जाता था और कोई अफ़्सर के आगे आकर उनके खिलाफ जाने की हिम्मत जल्दी करता नहीं था ।
दर्द होता है अब हम पढ़ते और देखते है की कश्मीर में लोग हमारे अपने ही भारतीय सैनिकों पर पत्थर फेकते है और उन्हें एक तो शान्ति बरतनी पढ़ती है या फिर गैस या छर्रे से लोगो को जवाब देना पढता है। पुरे भारत से गिने चुने लोग तो लोकशाही में फ्रीडम ऑफ़ स्पीच या बात करने की मुक्तता को इस हद तक इस्तेमाल कर रहे है की उन्हें हमारे जवानों का अपमान या किसी भी व्यक्ति को ठेस पोहचाने की पूरी इजाजत मिल गयी हो।

मुझे पूरा भरोसा है की अगर भारतीय सरकार चाहे तो ठोस कदम उठाकर भारतीय सैनिकों की मदद से पूरी तरह से कश्मीर में जीवन स्थिर कर सकती है, सरकार ने कुछ नजदीक के सालों में यह दिखा दिया है की अगर वे मन बनाये तो चीज़े हो रही है।  वह फिर नोटबंदी हो या फिर जि.अस.टी लागू करने की बात हो।  मेरे जैसे कहीं लोग चाहते है की अलगाववादीयों को दी गयी सिक्योरिटी और सुविधाएं निकाल कर उन्…